प्रयागराज। एक समय उच्च शिक्षा और कॉरपोरेट करियर छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने वाले “IIT बाबा” एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनके किसी प्रवचन या विचार नहीं, बल्कि शादी की खबर है, जिसने संत समाज से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस को जन्म दे दिया है।
कौन हैं “IIT बाबा”
“IIT बाबा” के नाम से पहचाने जाने वाले अभय सिंह एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने कथित तौर पर आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने विदेश में उच्च वेतन वाली नौकरी भी की, लेकिन अचानक सब कुछ छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया। करीब 30 वर्ष की उम्र में संन्यास लेने के बाद वे युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गए और आधुनिक शिक्षा तथा अध्यात्म के मेल की बात करते रहे।
महाकुंभ से मिली पहचान
अभय सिंह को व्यापक पहचान तब मिली जब वे महाकुंभ 2026 के दौरान प्रयागराज पहुंचे। एक युवा और उच्च शिक्षित व्यक्ति का संन्यासी के रूप में सामने आना लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। इस दौरान उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और उनसे मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे।
पहले भी रहे विवादों में
महाकुंभ के दौरान कुछ समय के लिए उनके अचानक गायब होने की खबरें भी सामने आई थीं, जिससे चर्चाओं का दौर शुरू हुआ था। इसके अलावा उनका यह बयान कि “मैं चेला बनाने नहीं आया हूं” भी विवाद का कारण बना था, जिस पर संत समाज के कुछ वर्गों ने आपत्ति जताई थी।
शादी की खबर से बढ़ा विवाद
अब उनकी शादी की खबर सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। संत समाज के कुछ लोग इसे संन्यास परंपरा के खिलाफ बता रहे हैं, जहां सांसारिक जीवन और विवाह का त्याग आवश्यक माना जाता है। वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय मानते हुए समर्थन भी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर दो राय
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। एक पक्ष का मानना है कि यह कदम उनकी आध्यात्मिक छवि के विपरीत है, जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है।
जानकारों की क्या है राय
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक संन्यास में सांसारिक संबंधों का त्याग प्रमुख माना जाता है, जिसमें विवाह भी शामिल है। हालांकि बदलते समय में कई लोग आध्यात्मिकता को व्यक्तिगत यात्रा मानते हैं, जहां नियमों की व्याख्या अलग-अलग हो सकती है।
